सच क्या है ?




"धर्म या मजहब का असली रूप क्या है ? मनुष्य जाती के
शैशव की मानसिक दुर्बलताओं और उस से उत्पन्न मिथ्या
विश्वाशों का समूह ही धर्म है , यदि उस में और भी कुछ है
तो वह है पुरोहितों, सत्ता-धारियों और शोषक वर्गों के
धोखेफरेब, जिस से वह अपनी भेड़ों को अपने गल्ले से
बाहर नहीं जाने देना चाहते" राहुल सांकृत्यायन



















Saturday, July 2, 2011

बाबा बनने के आसान तरीके.........


हमारा देश धर्म प्रधान देश है . धर्म यहाँ के लोगो की रगों में खून की तरह दौड़ता है . अब वह जमाना तो रहा नहीं जब ऋषि-मुनि,साधू संत घर-घर घूम कर लोगो को धर्म का ज्ञान बांटते फिरते थे . अब जमाना बदल गया है , देश माडर्न हो गया है , ऐसे में इस घोर कलयुग में लोगो को मोक्ष के रहस्य समझाने का बीड़ा उठाया है आधुनिक बाबाओ ने .

सदियों पहले देश के लोग सीधे सादे थे तब के साधू संत भे सीधे सादे और साधारण हुआ करते थे आज के दौर में जब देश तरक्की कर रहा है , देश में करोडपतियो की संख्या बढ़ रही है , देश में माध्यम वर्ग का तेजी से फैलाव हो रहा है ऐसे में माल संस्कृति के साथ साथ बाबा संस्कृति का भी तेजी से विकास हो रहा है .

इन बाबाओ की वजह से ही तो देश पुनः विश्व-गुरु बनने जा रहा है , हमारी सरकार को भी इन बाबाओ की उन्नति में ही देश की उन्नति का प्रतिबिम्ब दिखाई देने लगा है , इसीलिए देश में अन्य किसी भी उद्योग से अधिक तीव्रता से बाबा उद्योग बढ़ रहा है , चोर डकैत अपहरणकर्ता भी बाबा उद्योग में अपना भविष्य देखने लगे है , इसीलिए तो बाबाओ की जमात दिन दोगुनी रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ रही है . बाज़ार में बाबाओ की कई काटेगिरिज उपलब्ध है.

कोई इच्छाधारी बाबा है तो कोई निरंकारी बाबा
कोई तिलकधारी बाबा है तो कोई त्रिशोलधरी बाबा
कोई योग वाला बाबा है तो कोई भोग वाला बाबा
कोई दयालु बाबा है तो कोई कृपालु बाबा
कोई शिष्टाचारी बाबा है तो कोई कपटाचारी बाबा

आजादी के समय देश की आबादी के हिसाब से लगभग हर व्यक्ति पर एक देवता विराजमान थे , आज जनसँख्या चारगुनी हो गई परन्तु देवता तो उतने ही [३३ करोड़ ] रहे, इस अनियमितता को दूर करने का बीड़ा आधुनिक बाबाओ ने ही उठाया ,जिससे कोई आदमी देवता विहीन न रह जाये , इसलिए आज हर आदमी का अपना अलग एक बाबा हो गया है .
इस तरह बाबाओ की संख्या बढ़ी तो उनमे भी comptition पैदा हो जाना स्वाभाविक बात है ऐसे में एक बाबा को दुसरे बाबा से आगे जाने की होड़ पैदा हो गई . यह अलग बात है की अपने भक्तो को मोहमाया , लालच , इर्ष्या से दूर रहने की सलाह देते हुए खुद इन तुच्छ मानवीय कमजोरियों के सहारे जगत मिथ्या के यथार्त महासागर को पार करने की विवशता हो . क्यूंकि बाबावाद भी कुछ कुछ पूंजीवाद के अनुरूप ही खड़ा हुआ है जिसमे पूंजी ही सबकुछ होती है , परन्तु कुछ बातो में बाबावाद के नियम पूंजीवाद से थोड़े से अलग है . पूंजीवाद में जहाँ माया यानी पूंजी को सर्वोपरि मानकर पूंजी को अर्जित किया जाता है , वहीँ बाबावाद में पूंजी यानी माया को तुच्छ बताकर उसे झटका जाता है फिर इसी माया से आलिशान आश्रमों का निर्माण होता है जहाँ से माया के इस खेल का और व्यापक विस्तार किया जाता है . इस तरह कुछ बाबा जो इस होड़ में सफल हो जाते है उनकी पांचो उंगलियाँ घी में और सर कडाही में हो जाती है , फिर तो सरकार भी उनकी लोग भी उनके और मिडिया भी उनकी . जो असफल हो जाते है वो बलात्कार या अवैध कब्जे जैसे मामूली लफ़ड़ो में कुछ समय फाइवस्टार जेलों में प्रवचन कर आते है .

बाबावाद में सफल होने का सब से आसान तरीका है आत्मविश्वास अगर आपमें यह गुड है तो आप भी आजमा सकते है . बाबा बनने का गुरुमंत्र है "झूठ बोलो कांफिडेंट के साथ" . आपकी शिक्षा , योग्यता या ज्ञान से यहाँ कोई मतलब नहीं यह सब तुच्छ चीजे है अगर आप बाबा बनने जा रहे है तो इन चीजो को अतिशीघ्र अपने से दूर करें .

बाबा बनने से पहले कुछ आवश्यक बातो को ध्यान में रखे , सबसे पहले आपको अपनी वेशभूषा बदलनी होगी , पैंट कमीज की जगह भगवा वस्त्र धारण करें , तिलक लगाये , दो चार मालाएं हमेशा पहन कर रखे , दाड़ी और मूछों और साथ ही सर के बालों का विशेष ध्यान रखे . प्रतिदिन स्नानादि की आदत छोड़ दें क्युकी आगे चलकर जब आप प्रतिष्ठित बाबा बन जायेंगे तब आप इतने व्यस्त हो जायेंगे की आपको महीने में एकाध बार संयोगवश ही नहाने का सुअवसर मिलेगा .

इसके बाद आप यह तय करे की आपको किस कैटेगिरी का बाबा बनना है , अगर आप थोड़े से रंगीनमिजाज है भोग विलास अय्याशी में आपकी अधिक रूचि है तब आप इच्छाधारी टाइप बाबा बन सकते है इसके लिए आपको शाश्त्रो की कुछ कहानियाँ और कुछ भजनों को तोते की तरह रटना होगा . ध्यान रहे की आपकी वाणी में माधुर्यरस हो , कोमलता हो और वाणी में चातुर्य का होना तो सबसे आवश्यक है .

अगर आप कुछ और बड़ा करना चाहते है तो आप अगली कैटेगिरी पर ध्यान दे अगर आप बेवकूफ बनाने की कला में महारत हासिल कर चुके है तो आप ज्योतिषाचार्य बन जायें , इसके लिए आपको कुछ गृह नक्षत्रो के नाम याद करने होंगे बस . शुरुआत में आप "त्रिकालज्ञ विश्व के महान ज्योतिषाचार्य" इस तरह के पर्चे बंटवा दीजिये . जैसे ही कोई पहला मुर्गा फंसे , तो उससे कहिये "आने वाला सप्ताह तुम्हारे लिए ठीक नहीं है , तुम कहीं जाओगे तुम्हे छींक आएगी और तुम किसी गटर में या किसी ब्लूलाइन बस के निचे आकर मर सकते हो , तुम्हारे ऊपर शनि की कुदृष्टि है , राहु और केतु तुम्हारे कंधे पर सवार है , इसके समाधान के लिए तुम्हें किसी मगरमच्छ का १०० ग्राम आंसू और चील का मूत लाना होगा जिसे तुम्हे अपनी बीबी के सिंदूर और चूल्हे की कालिख में मिलाकर अपने चेहरे पर पोतना होगा और ये कालिख लगाकर तुम्हे शनिवार के दिन मोहल्ले में घुमने के बाद सूर्य को जल देकर गौमूत्र से नहाना होगा , नहीं तो तुम्हारी बीवी विधवा और तुम्हारे बच्चे अनाथ हो जायेंगे" . यह सब सुनकर जब सामने वाले के तोते उड़ जाये तब उसे इस समस्या का दूसरा और सरल उपाय समझाएं , उससे कहे की "तुम्हारी कुशलता के लिए यह सब काम हम किसी अपने चेले के द्वारा करवा सकते है जिसमे कम से कम ५०००रु का खर्च आ सकता है .

इस तरह जब आप एकाध वर्ष में ही एक प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य बन जायेंगे तब आपको टी.वी. चैनलों का निमंत्रण मिलने लगेगा . चैनल पर आने के बाद आपकी प्रतिष्ठा में चार चाँद लग जायेंगे . तब अधिक पैसा देकर दुसरे चैनल वाले आपको अपनी टी.आर.पी बढ़ाने के लिए बुलाने लगेंगे , आप इस तरह के सुअवसर को कभी हाथ से न जाने दें और झट पहले वाले को धोका देकर दुसरे चैनल में चले जायें , वहां जाकर अपने पहले प्रवचन में ही यह बात अवश्य कहें की "संसार एक धोका है तो हे मानव किसी को धोका न दों और मोह-माया एवं लोभ से दूर रहो ", इस तरज की बाते दोहरातें रहे , इसके साथ ही हर बात पर पश्चिमी सभ्यता को कोसना न भूलें , सभी प्रश्नों के उत्तर में एक बार यह बात अवश्य दोहराएं "ये तो हमारे शाश्त्रो में पहले ही कही जा चुकी है" और "यह सब तो पश्चिमी सभ्यता का असर है" , इस समय तक आप एक प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य हो चुके होंगे , आपसे लोग देश की समस्याओं के विषय में भी प्रश्न करेंगे , महंगाई के प्रश्न पर आप कहें की "देश पर अभी साढ़े-साती चल रही है , साढ़े-सात महीने बाद महंगाई अपने आप काम हो जाएगी अन्यथा महंगाई नाशक यज्ञ करना होगा ", बेरोजगारी के विषय में कहें की "भारत महाशक्ति बनने जा रहा है तो बेरोजगारी जैसी छोटी-मोटि बातें अपने-आप समाप्त हो जाएँगी" ,

नक्सलवाद और आतंकवाद के विषय में कहें की "जब जब आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ने लगता है तब-तब भगवान अवतार लेते हैं" , इसके साथ ही गीता का 'यदा-यदा ही धर्मस्य .......' वाला श्लोक ऊँची आवाज में पढ़ें.

महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के विषय में कहे की "यह सब तो पशिमी सभ्यता का असर है". भुखमरी और कुपोसण के विषय में कहें की "यह सब उनके पिछले जन्म के पापों की वजह से है अवश्य उन्होंने पिछले जन्म में किसी की रोटी छीनी होगी ", पश्चिमी सभ्यता की निंदा करते समय यह बात भी अवश्य कहें की "पश्चिम का सारा विज्ञानं हवाई जहाज से लेकर कम्प्यूटर तक हमारे शाश्त्रो की देन है , अंग्रेज हमारे शाश्त्र विदेश ले गए और उसमें से सारा विज्ञानं निचोड़ लिया" . इसके बाद चैनल के माध्यम से यह भी कहना न भूलें की "पृथ्वी अचला है और सूर्य भगवान रथ पर सवार होकर पृथ्वी का चक्कर लगाते है" , अगर लोगों को यकीन न हो तो आप तुलसी रामायण की चौपाईओं से इसका प्रमाण भी दे सकते हैं की पृथ्वी शेषनाग के फन और कछुए की पीठ पर स्थित है 'कमठ शेष सम धर वसुधा के' (रामचरितमानस २०/७) ऐसा हमारे शाश्त्र कहते है, अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए यह भी दोहरादें की यही बात तो बाद में यूरोप के वैज्ञानिकों ने सिद्ध भी कर दिया है .

अगर आप ज्योतिषाचार्य से भी बड़ा नाम कमाना चाहते है तब आपको श्री-श्री कविशंकर अथवा बाबा कामदेव जैसा योग-भोग या रोग गुरु बनना पड़ेगा . अब योग-भोग-रोग का तो पहले ही पेटेंट कराया जा चुका है अतः आपको अब कुछ नया करना पड़ेगा . आप शाश्त्रो के नाम पर किसी नई कला का ईजाद कर सकते है , जैसे आप मुर्गा बनने की नई तकनीक शाश्त्रों के नाम पर प्रचारित का सकते है , आप कह सकते है की ये कला पूरी तरह भारतीय है और हमारे शाश्त्रों में वर्णित है . इस तरह मुर्गा बनने से मानव के सारे कष्ट दूर हो सकते है . बवासीर, भगंदर, पोलिओ, टी.वी, कैंसर ब्रेनहैमरेज या हार्टप्रोब्लम्स जैसे रोग चुटकियों में दूर हो सकते है तथा इस विधि से विश्वशांति आ सकती है , दुनिया की आतंकवाद समेत सभी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है . आप अपनी इस ईजाद को 'चिकन योग' का नाम दे सकते है , धीरे-धीरे जब आप एक प्रतिष्ठित 'चिकंयोग' गुरु बनकर लोगों को 'आर्ट आफ लिविंग' सिखाने लग जायेंगे या भारत के स्वाभिमान की रक्षा के नाम पर देश की सत्ता हथियाने का ख्वाब देखने लग जायें ,इससे पहले ही आप 'मुर्गांजलि' नाम से अपनी दवाइयों की फैक्ट्री खोल लें , ध्यान रखे की अपने 'चिकन योग के प्रचार के दौरान आप विदेशी कंपनियों ,विदेशी अविष्कारकों ,एवं पश्चिमी सभ्यता को गालियाँ देतें रहे ,चाहे आप के कारखाने में जो भी मशीनें हो सभी विदेशी कंपनियों ,विदेशी अविष्कारकों और पश्चिमी सभ्यता द्वारा निर्मित की गयीं हों .

इस तरह आप एक दिन बहुत बड़े व्यक्ति बन जायेंगे देश विदेश में आपकी हजारों शाखाएं खुल जाएँगी , आपको पश्चिमी संस्कृति के लोग आपकी उच्च भारतीय सभ्यता से प्रभावित होकर आपको अपने यहाँ आमंत्रित करेंगे .वहां जाकर आपको अपने वक्तव्यों में थोडा सा परिवर्तन करना पड़ेगा . वहां आपको कहना होगा की प्रथ्वी गोल है और सूर्य का चक्कर लगाती है ऐसा हमारे शाश्त्रो ने ५००० वर्ष पहले ही बता दिया था . आपने अगर कुछ और कहा तो हो सकता है आपको जूते पड़ने लगें क्यूंकि पश्चिमी सभ्यता तो असभ्य है ना ;-

अगर आपको लगता है की 'चिकनयोग' के बहाने ही सही खुद मेहनत कर दूसरों को मेहनत करने की प्रेरणा देना आपके बस की बात नहीं तो घबराने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं , अभी और भी कई कैटेगिरीज अभी बाकि हैं .

आप चाहें तो बापू कैटेगिरी के बाबा बन सकते है , जरा ठहरिये ! यहाँ गाँधी वाले बापू की बात नहीं हो रही , बल्कि हम बात कर रहे हैं ;-बम-पिस्तोल ,मोर्टरार जी बापू या निराशाराम जी बापू वाली कैटेगिरी की . इस कैटेगिरी का बाबा बनने के लिए भी आपको तुलसी रामायण के " ढोल , गंवार ,शुद्र ,पशु ,नारी ये सब ताडन के अधिकारी "सरीखे कुछ चौपाइयों की रटटमपेल करने की आवश्यकता होगी , इसके साथ-साथ दूसरी कैटेगिरीज के लिए बताई गई कुछ बातों का भी विशेष ध्यान रखें .

इस कैटेगिरी में आने के लिए सबसे पहले आपको अपने किसी सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर वहां जागरण ,भजन कीर्तन ,प्रवचन से ही शुरुआत करनी होगी .अगर आप शुरुआत में ही कुछ प्रतिष्ठित हो जाते है तब आप किसी की भी जमीन पर कब्ज़ा कर सकते है , बस आपको लोगों को समझाना होगा की "मरने के बाद तुम्हारी जमीन तुम्हारे किसी काम की नहीं , इस तरह आप हजारो बीघा जमीन के मालिक बन सकते है . जो ख़ुशी से अपनी जमीन आपके नाम नहीं करता उसकी जमीन पर धोके से आश्रम बनाये जा सकते है , बाद में अगर केस मुक़दमे की नौबत आती है तो घबराने की आवश्यकता नहीं , क्यूंकि तब तक आपके भक्त बड़े बड़े वकील होंगे , राज्य के बड़े-बड़े सरकारी अफसर तो आपके नौकर-चाकरों में से होंगे जो आपके तलवे चाटने में अपने आप को धन्य समझेंगे . फिरभी अगर आपका कोई पूर्व भक्त मोह-माया में फंसकर चंडोक या चांडाल वाली हरकत कर बैठे यानी आपके विरुद्ध गवाही देने को तैयार हो तो उस पर जानलेवा हमला करवा सकते है , उसे यमलोक भेजने का प्रबंध कर निश्चित हो सकते है क्यूंकि आपका तो कुछ बिगड़ने वाला नहीं .

अगर आपको बापू बनने में झंझट का काम लगता है तो चिंता करने की कोई जरुरत नहीं , आप अगली कैटेगिरी चुन सकते है ,यह है महाराज वाली कैटेगिरी . इस कैटेगिरी का सबसे बड़ा लाभ तो यह है की आप लोकतंत्र में भी महाराज की पदवी से नवाजे जायेंगे. इस कैटेगिरी में आप दयालु जी महाराज, झगडालू जी महाराज, कुधान्शु जी महाराज,या मतपाल जी महाराज जैसी कोई भी पदवी धारण कर सकते है , रटना तो यहाँ भी पड़ेगा . कुछ ही वर्षो में जब आपका बोल-बाला खूब हो जाये ,भक्तो की कृपा से आलिशान महल सरीखे आश्रम निर्मित हो जायें , तब आप दिखावे के लिए अपनी माँ, दादी,चची, नानी,या सास के श्राध का आयोजन करें और पूर्व जन्मों के कष्टों को झेल रहे गरीब नाम के लोगो को २०रु के भोजन का प्रलोभन देकर अपने आश्रम में आमंत्रित करें. अब पुरे देश में ढिंढोरा पिटवाने की जोहमत न उठाएं क्यूंकि ८४ करोड़ लोग इस देश में २०रु रोज पर गुजरा करते है , ऐसे में अगर सब के सब आ गए तो आपके शारीर पर कपडे और सर पर बाल भी नहीं बचेंगे , इसलिए केवल अपने क्षेत्र में ही ढिंढोरा पिटवायें , फिर देखें की एक वक्त की रोटी के लिए ६०-७० हजार तुच्छ प्राणी कुत्तों की तरह दौड़े-दौड़े पहुँच जायेंगे , आपको इन भूके-नंगे लोगो के लिए उचित व्यवस्था करने की कोई आवश्यकता है ही नहीं , अगर भगदड़ में ६०-७०मर भी जाते है , तो इसमें आपका तो कोई दोष नहीं , आप तो निश्चिन्त होकर अगले दिन के बुआ के श्राध की तयारी करें , जो मर गए उन्हें तो भगवान ने मारा , वैसे भी देश में रोज तीन हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं में मरे जाते है .सात हजार बच्चे रोज भुखमरी और कुपोषण से मर जाते है , ६०-७०किसान रोज आत्महत्या कर लेते है ,इतने ही लोग गन्दा पानी पीने के कारण मर जाते है , तब तो कोई हंगामा नहीं मचता फिर आप ६०-७० तुच्छ प्राणियों के मारे जाने का अफ़सोस क्यों करते है आप काहे टेंसन लेते है.

आपके आश्रम में मरे हुओं के लिए हमारे महान अर्थशाष्त्री प्रधानमंत्री जी आपकी संपत्ति को कुर्क करने की बजाये संसद में मुआवजे की घोषणा कर देंगे . उसके अगले दिन देश के युवराज मरे हुओं के घरों में दौरों के बहाने दावत उड़ा आयेंगे . तीन-चार दिन बाद प्रदेश की मुख्यमंत्री जी दों-दों लाख के मुआवजे की घोषणा कर देंगी .बस हो गई मरने वालों के परिवारों की बल्ले-बल्ले. जिनका कोई नहीं मरा वो खुद को कोसेंगे . अब जरा सोचिये की कितने लोगो का भला होगा आपके कारण....

बाबा बनने के लिए आपको कुछ ख्याति प्राप्त बाबाओं के जीवन चरित्र का अनुसरण भी करना पड़ेगा इसके लिए आप आजकल के कुछ अति विख्यात (या कुख्यात)बाबाओं के चरित्र का अनुसरण कर सकते हैं जैसे भिमानंद जी महाराज जिनके चरित्र से आपको कुछ ही समय में 'चोर से महाराज' बनने की सीख मिल सकती है , इसी तरह आप नित्यानंदस्वामी जी के जीवन चरित्र से अध्यात्म के नाम पर (अभिनेत्रियों संग) अय्याशी के गुण सीख सकते हैं, या फिर आशाराम बाबु सरीखे बाबाओं से आश्रमों के नाम पर सरकारी जमीन हड़पने की कला सीख सकते हैं.

इन बाबाओं की सीडियां मंगवाकर जो 'उचित मूल्यों' पर उपलब्ध हैं और इनके प्रवचनों के महान ज्ञान से खुद भी लाभान्वित होकर बेवकूफ जनता को भी लाभान्वित होने का सौभाग्य प्रदान कर सकते हैं....

तो फिर देर किस बात की बाबाओं की भीड़ में एक बाबा और सही..........!

शकील 'प्रेम'

3 comments:

  1. शकील प्रेम जी बिलकुल सही लिखा है आपने ये संत नहीं ठग हैं ठग।
    दूसरों को मोह-माया से दूर रहने की शिक्षा देने वाले ये खुद उसमें इतना लीन हैं कि इनके ऐशो-आराम देखकर खुद भक्त भी चकरा जाता है। इसी तरह इन पाखंडियों का पर्दाफाश करते रहिए। आपकी इस मुहिम में मेरा आपको पूरा समर्थन है। मेरा ब्लॉग भी धर्म के अंधकार से लोगों को बाहर निकालकर वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण के प्रसार के उद्धेश्य के लिए बनाया गया है।

    मेरे ब्लॉग पर भी पधारें- संशयवादी विचारक

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  2. mulle sakil teri gaand me dam hai to kise mulle ke bare me yesa kament kar aage se yesa kament kare to adress bhi diya kar jesse log teri maa bahan ek kar sake
    sale tughe land pakdne ki tamij nahi hai
    gaand marane ki darkhwast de rakhi hai
    jis naaga baba ki tune tasweer chaapi hai ek baar ussa gaand mara kar dekh maa aur bahan ko bhi jarur le jayega yesa mera viswas hai

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  3. जय शकील बाबा ...........बहोत ही अच्छा लेख लेकिन लोग इसे पढ़ के सिर्फ भूल जाते हैं अगर समझने लगे तो क्या कहने .....

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