सच क्या है ?




"धर्म या मजहब का असली रूप क्या है ? मनुष्य जाती के
शैशव की मानसिक दुर्बलताओं और उस से उत्पन्न मिथ्या
विश्वाशों का समूह ही धर्म है , यदि उस में और भी कुछ है
तो वह है पुरोहितों, सत्ता-धारियों और शोषक वर्गों के
धोखेफरेब, जिस से वह अपनी भेड़ों को अपने गल्ले से
बाहर नहीं जाने देना चाहते" राहुल सांकृत्यायन



















Thursday, September 1, 2011

धर्म का दोगलापन


धर्म की बुनियाद ही अंधविश्वास पर है जिसे आस्था भी कहा जाता है सत्य से धर्म का सदियों से बैर रहा है, अनैतिकता,अत्याचार,सामाजिक असमानता और अकर्मण्यता धर्म की दुनिया को ये महान सौगात है

जब भी किसी ने धर्म के उपर उंगली उठाई उसको हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया....धार्मिक लोग गिरगिट की तरह होते है राम के नाम पर भव्य मंदिर बनेंगे ,हर साल अरबों रुपये रावण दहन के नाम पर जलाएँगे अरबों रुपये राम के नाम पर (दीवाली)बारूद में झोंक देंगे सब राम 'भगवान' के नाम पर....

लेकिन जब कहोगे की राम ने एक स्त्री के नाक-कान क्यूँ काट दिए थे तब वही राम एक साधारण मानव बना दिए जाएँगे और कहा जाएगा की अपनी बीवी को बचाने के लिए राम ने ऐसा किया....यही भगवान राम मामूली इंसान बना दिया जाएगा जब पूचोगे की सीता को क्यूँ निष्कासित किया, यही राम भगवान राम बाली-वध, शम्बूक-वध, लक्षमण निष्कासन, लंका-दहन जैसे कुकृतों पर भी मामूली इन्सान बन जाता है, गिरगिट की तरह रंग बदलने की इसी प्रवित्ती ने धर्म को जिंदा भी रखा हुआ है,

महात्मा बुध को इनके ही धर्म ग्रंथ गलियाँ देते नहीं आघाते वाल्मीकि रामायण बुध को चोर घोसित करती है (देंखे-अयोध्या-कांड,सर्ग-109,श्लोक-34)लेकिन जब अपनी महानता बखाननी हो तब यही बुध विष्णु के अवतार घोषित कर दिए जाते हैं,

इसी तरह दयानंद सरस्वती का भी इस्तेमाल किया जाता है अपने दोगलेपन को साबित करने के लिए....जिनका कहना था इन धर्मग्रंथों के लेखकों के बारे में की "ये लोग पैदा लेते ही मर क्यूँ नही गये या केवल अपनी माँ को प्रसूति में प्रीडा देने के लिए ही इनका जन्म हुआ"(एकादश समुल्लास)

5 comments:

  1. पिछले दिनों कबीर पर बनी एक एनिमेटिड फिल्म देखी थी जिसमें कबीर की जन्मसाखी को विष्णु के साथ जोड़ा गया था जिसे देख कर हँसी आ गई. लेकिन यह एक योजना के तहत किया गया था.

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  2. पाखंड ही तो जिंदा रखता है इनको।

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  3. धर्म एक एेसी दुकान है िजसमें केवल अन्धविश्वास िबकता है

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  4. कुछ लोग पूर्वाग्रही से इतना ग्रसित है कि उन्हें केवल हिन्दू धर्म में बुराई ही नजर आती है. यदि हिन्दू समाज इतना ही बुरा होता तो आज भारत देश सभी लोगो के अमन चैन से नहीं जी पाते. धर्म बुरा नही होता उसे मानने वाले की सोच में विकृत होती है. यह पोस्ट जिस मुस्लिम भाई ने लिखी है उनसे एक अपील है कि जिसके घर शीशे के है वे दुसरे के घर पत्थर नही फेका करते ............

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    1. अगर हिन्दू धर्म में तनिक भी सच्चाई होती तो यह सिर्फ भारत का धर्म बन कर न रह जाता बौद्ध धर्म भी है और अगर भारत का विदेशो में गौरव बढ़ाया है तो बौद्ध धर्म ने और मुस्लिम धर्म को छोड़ दिया जाए तो बौद्ध धर्म के विश्व ६५ % अनुयाई है किन्तु इसी के विपरीत हिन्दू धर्म के न के बराबर और हिन्दू धर्म की कोई एक परिभाषा ही नहीं बन स्की जितने मूह उतनी परिभाषा। ………हिन्दू धर्म के आप जैसे अनुयाई सिर्फ पूर्वाग्रही हो कर लड़ने और लड़ाने की बात करते हो

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