सच क्या है ?




"धर्म या मजहब का असली रूप क्या है ? मनुष्य जाती के
शैशव की मानसिक दुर्बलताओं और उस से उत्पन्न मिथ्या
विश्वाशों का समूह ही धर्म है , यदि उस में और भी कुछ है
तो वह है पुरोहितों, सत्ता-धारियों और शोषक वर्गों के
धोखेफरेब, जिस से वह अपनी भेड़ों को अपने गल्ले से
बाहर नहीं जाने देना चाहते" राहुल सांकृत्यायन



















Tuesday, August 30, 2011

मैं अपने मित्रों से ये निवेदन करता हूँ


मैं अपने मित्रों से ये निवेदन करता हूँ की वे मेरे नाम के कारण मेरे लिए ''आपका समाज'' या ''सुधारवादी मुस्लिम''जैसे शब्दों का प्रयोग न करें क्यूंकि अपने लिए मुस्लिम संबोधन को मैं गाली सामान समझता हूँ ,मैं आपको बता दो की मैं मुस्लिम नहीं हूँ मैं इस्लाम को कबका छोड़ चुका हूँ,सभी पारिवारिक अंतर्विरोधों को सहन करते हुए मैंने यह कदम उठाया,आज मैं या मेरे बिविबच्चे सभी धार्मिक आडम्बरों से आजाद होकर खुश हैं,

मैं इसी भारतीय समाज का हिस्सा हूँ मेरे पूर्वज इसी भारतीय समाज के छुआछूत,अश्प्रिश्यता,जातीय घृणा,एवं अछूतों पर किये गए अमानविये कुकृत्यों के कारण इस्लाम को अंगीकार करने को विवश हुए थे,इस तरह मैं स्वयं हिन्दू धर्म के जातिवाद का भुक्त भोगी रह चुका हूँ,इसी वजह से मैं किसी भी तरह इस भारतीय समाज के कायाकल्प का इच्छुक एवं इसके लिए अपने स्तर पर प्रयत्नशील भी हूँ,

भारत बंगलादेश एवं पाकिस्तान के नब्बे प्रतिशत मुस्लिम या ईसाई हिन्दू धर्म के जातिवाद की बीमारी के कारण ही अतीत में इससे अलग हुए जिन कारणों से यह सब हुआ वो जातिवाद नाम की बीमारी आज भी कायम है आज भी हिंदुस्तान में झज्जर,गोहाना,या मिर्चपुर की घटनाएं होती है इन्हीं वजहों से आज भी धर्मपरिवर्तन की घटनाएं जोरों से हो रहीं हैं प्रबुध्ध वर्ग के लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रज्ञा या असीमानंद का समर्थन करने की बजाये जातिवाद का विरोध क्यों नहीं करते

क्यूँ नहीं ये लोग समाज में अपने घर से आरम्भ करते हुए अतार्जतिये विवाहों का समर्थन करते,अमेरिका के अनुसार भारत को महाशक्ति घोषित किये जाने पर तो बहुत से लोग खुश होते है परन्तु सरकारी कुछ गैर सरकारी सूत्रों के अध्यन के बाद जो भारत की सच्ची तस्वीर निकल कर सामने आती है वो इन लोगों को हजम नहीं होती,

मेरा सम्बन्ध बिहार से है और मैं लगभग भारत के आधे से भी अधिक राज्यों में घूम चुका हूँ मुझे असली भारत का अनुभव है मैं जहाँ भी जाता हूँ रेल की निम्न श्रेणी में ही यात्रा करता हूँ बिहार झारखण्ड बंगाल जाने वाली ट्रेनों में कभी आपने देखा है इंसानों की हालत को किस तरह जानवरों की भांति ठूसा कर जाते है,बिहार की गालिओं में ही मेरा बचपन बीता है जहाँ आज तक लोगों को गणतंत्र होने का अनुभव ही नहीं हो पाया,क्या इसी तरह देश महाशक्ति बनते हैं

2 comments:

  1. जाति और धर्म! क्या कहें?

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  2. poore desh ki yatra ka kharch kon utha rah ahai ji.aur aap apna pariwar chalane ke kiye kuch karte bhi hai ya nahi..

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